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आरक्षण खत्म यानि हिन्दू धर्म में जातियां ख़तम

Posted On 17 Feb, 2017 में

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आरक्षण खत्म यानि हिन्दू धर्म में जातियां ख़तम

अब आयेगी बहार असली आज़ादी की, हिन्दुतान इस बार आने वाले 15 अगस्त को असली आज़ादी का मज़ा चखेगी। हिंदुस्तान को गुलाम बनाने वाले लोगों का खाब पूरी तरह से बर्बाद होने जा रहा है। अब खुद ऐसे नेता भी रोने को तैयार है जो जाति के नाम पर लोगों को लड़ाने में लगे रहते थे और अपनी राजनितिक रोटियां सेंकते थे।
वास्तव में अब हर तरफ समानता का अधिकार फ़ैल सकेगा जब कोई भी किसी भी तरीके का काम कर सकेगा, किसी भी स्थान पर आने जाने से रोका नहीं जायेगा क्योकि किसी को यह कहकर बतलाया नहीं जायेगा कि तुम्हे तो आरक्षण मिलता है तुम तो नीची जाति के हो।
इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव हमारे देश की नयी पीढ़ी की सोच पे होगा, क्योंकि यहीं से ही अलग अलग होने की सोच जन्म लेती है।
हम चाहे जितना भी कोशिश करते है समान रहने की, एक साथ उठने बैठने की, एक साथ खाने पीने की, लेकिन अलगाव की नीति हमें बचपन से ही सताने लगती है।
बहुत अधिक संख्या में स्कूलों में खास कर के सरकारी स्कूलो में पढ़ने वाले बच्चों में जहां आज के समय में दलित और ठाकुर, दलित और ब्राह्मण, दलित और राजपूत एक साथ पढ़ते है, एक साथ बैठते है, एक साथ खाना भी खाते है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो एक दुसरे को जानते- पहचानते नहीं। इसका कारण उनकी सोच में समानता नहीं बल्कि उनकी आर्थिक स्तिथि में समानता का होना है क्योंकि दलित अब उतना गरीब नहीं रह गया और ऊंची जाति के अब उतने अमीर नहीं रहे। लेकिन जाति तो जाति है। जो सोच इतने सालों से चली आ रही है वो अब इतनी आसानी से खत्म नहीं हो सकती।
अलग अलग जाति होने की सोच इस नई पीढ़ी को तब खटकती है जब इस देश का संविधान खुद उन्हें अलग होने
के लिए दर्शाने लगती है। साथ पढ़ने और साथ-साथ होने के बाद भी ऐसा समय आता है कि जब एक अध्यापक खुद उन्हें जाति के नाम पर यानि आरक्षण के नाम पर सरकारी सुविधा देने के लिए परिचित करता है जिससे ऊंची जाति के बच्चों का गुस्सा जो उन्हें अपने परिवार और अपने घर से मिलता है वह दलितों के लिए अब धीरे धीरे नफरत में बदल जाता है वह भी अब यह सोचने लगते हैं कि हम भी अब गरीबी रेखा तक आ पहुंचे हैं हमारे भी घर में अब खाने-पीने की दिक्कतें शुरू हो चुकी हैं हमें भी सरकार सुख सुविधाएं दें वह हमारे बारे में क्यों नहीं सोचते।
धीरे-धीरे वक्त के साथ-साथ यह प्रश्न बढ़ते जाते हैं और बढ़ते जाते हैं पहले तो स्कूलों में फिर अच्छे अच्छे कॉलेजों में और फिर सरकारी नौकरियों में और हर तरह की सुख सुविधाओं में।

लेकिन अब शायद सरकार पूरी हिंदुस्तान की इन भावनाओं से पूरी तरह परिचित हो चुकी है और समझ चुकी है कि अगर हिंदुस्तान को पूरी दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाना है तो इस देश में रहने वाले इन लोगो को और इनकी सोच को एक साथ- एक समान करना होगा। उनके बीच फैली ऐसी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी अलगाव की नीति को हटाना होगा।

इस सोच के साथ सरकार ने आरक्षण जोकि अलगाव की सबसे बड़ी निति है उसको हटाने की कोशिश से शुरुआत की है।
अब देखना यह है कि सरकार इस मुहिम को कहां तक चलाने में सक्षम है और इस देश की लोग सरकार की इस मुहिम को कहां तक चलाने में कहां तक फैलाने में और कहां तक बढ़ाने में साथ देते हैं। फैसला अब खुद भारत के लोगों के हाथ में होगा कि वह अपने देश को एक सूझबूझ से आगे बढ़ाने में सबके साथ को एक शक्ति समझने में और अपने देश को शक्तिशाली बनाने में आगे आते हैं या नहीं?

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=589405527850782&substory_index=0&id=258625520928786



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